Thursday, May 8, 2008

क्या हो गयी है खेल पत्रकारिता

आज मैं कुछ खेल के पत्रकारों की बातें सुन रहा था. वो भारत मैं आए खली द ग्रेट की बातें कर रहे थे. मैं दंग था. जिस तरह वो खाली के गुर-दाँव पर विशेषज्ञों की तरह बात कर रहे थे मुझे बड़ी हैरानी हो रही थी ...इस दौरान इन विशेषज्ञों की वजह से मैंने डब्लूडब्लूई के हेड -बट, खली वाइज़- ग्रिप, खली बॉम्ब, बिग बूट, स्पिन किक जैसे कई दावों के नाम सुने. और मुझे बड़ी हैरानी हो रही थी कि इस विषय पर ये कितनी देर बात कर सकते हैं.

इत्ताफाकन 100 मीटर स्प्रिंट की बात भी चल पडी..और तब जो मैंने सुना या नही सुन पाया उसने मुझे ज्यादा हैरान किया. ताज्जुब हुआ कि किसी को ये नही पता था की हाल में 3-4 दिन पहले किसने 100 मीटर की रेस मैं एक इतिहास कायम किया है. मैंने थोड़ा हिंट देने की कोशिश की कि ये खिलाड़ी असाफा पॉवेल के देश (जमैका) का रहनेवाला है. खबरों की दुनिया और उसमें भी भी खेल की दुनिया से जुड़े पत्रकारों का ये हाल था कि उन्होंने उसैन बोल्ट के अलावा सबका नाम ले लिया.

ज़ाहिर है उसने ये रेस 9.76 सेकेंड में ये दौड़ पूरी की होगी इसकी उम्मीद करना छलावा ही होता. लेकिन 10 सेकंड के अन्दर ही ये पत्रकार 100 मीटर दौड़ के भी विशेषज्ञ बन गए. इसे लाजवाब आत्मविश्वास कहें या अपने आप के प्रति बेमिसाल उद्दंडता या फिर कुछ और ये आप तय करें....

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