माँ को बख्शा' तो....
बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट संघ) कमाल है. उसने इसी साल सिडनी टेस्ट (2-6 जनवरी, भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया ) के दौरान और उसके बाद उस खिलाड़ी का बचाव किया, जिसने माना कि मैदान पर उसने दूसरे खिलाड़ी (एंड्र्यू साइमंड्स) को गाली दी..चलिए मसला दूसरे देश के खिलाड़ी और रेसिज्म से जुडा था, इसलिए बचाव कर भी लिया...पर क्या उस वक्त भारत में उस खिलाड़ी को सज़ा नही दी जानी चाहिए थी ? कम से कम ये कहकर कि भारत में इस गाली को ख़राब माना जाता है.... और किसी भी रोल मॉडल या मानी जानी वाली हस्ती को ये सब कहने-करने से पहले दस बार सोचना पडेगा...
अब भज्जी ने जो किया बीसीसीआई के अधिकारी उसे पचा नही पा रहे..नैतिकता के प्रणेता बने फिर रहे हैं..भज्जी के खुलेआम माफीनामे के बाद भी कह रहे हैं कि इस खिलाड़ी का ट्रैक रेकॉर्ड ख़राब है. लेकिन ये समझना चाहिए कि जो खिलाड़ी माँ की गाली के बाद किसी हीरो की तरह सराहा जाएगा वो आगे वैसा कर सकता है जैसा उसने किया.
आपने एक चोर की कहानी सुनी होगी जिसकी माँ उसे बचपन में चोरियाँ करना सिखाती थी. बाद में वो बड़ा मशहूर चोर बन गया. बहुत वर्षों बाद जब जवानी में वो चोर पकड़ा गया तो उस राज्य के राजा ने उसे फांसी की सज़ा दे दी. फांसी के पहले चोर से उसकी आख़िरी इच्छा पूछी गयी. उसने कहा वो मरने से पहले अपनी माँ के कानों में कुछ कहना चाहता है. उसे इसकी इजाज़त मिली. वो अपनी माँ के कानों में कुछ कहने गया और ये कहकर कान काट लिया की ये सब उसी ने उसे सिखाया है. इसलिए उसे भी सज़ा मिलनी चाहिए. बीसीसीआई चोर की माँ की भूमिका निभा रहा है.
वैसे भी मैदान पर मारपीट की ये पहली घटना नही है. साल पहले 2006 फुटबॉल कप फाइनल के दौरान सुपरस्टार जिनेदिन जिदान ने इटली के मार्को मतेरात्जी को मैदान पर हेड-बट से गिराया तो उसकी आलोचना हुई. जिदान और उसकी टीम को उसका भारी खामियाजा भी भुगतना पडा. लेकिन उन्हें फांसी पर नही चढा दिया गया. पांच साल पहले आर्सेनल के ख़िलाफ़ हार के बाद मैनचेस्टर युनैतेद के कोच सर अलेक्स फर्ग्युशन ने फुटबॉल ड्रेसिंग रूम में गुस्से में बूट फेंका जो सुपरस्टार खिलाडी डेविड बेकहम के सर पर लगा। मगर दोनों का करियर खत्म नही कर दिया गया.
चीन में कर(टैक्स ) चोरी से लेकर, भ्रष्टाचार और मर्डर- सबकी सज़ा फांसी है..हरभजन पर पहले ही बड़ा जुर्माना लगाया जा चुका है..अब दो या तीन सीरीज़ के बैन से लेकर आजीवन प्रतिबन्ध की बात चल रही है.. ऐसा कर बीसीसीआई क्या साबित करना चाहता है? ऐसा करने से पहले उसे अपने दामन में ज़रूर झांकना चाहिए. तब जो उदाहरण वो पेश करेंगे उसका सचमुच कोई मतलब होगा.
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