आज से क्रिकेट में एक नई जंग शुरू होगी और वह कई नई दिशाओं में दौड़ेगा... खिलाड़ियों और टीमों के सपनों को नया आयाम मिलेगा... 44 दिन के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए देश के आठ बिज़नेस किंग ने 3000 करोड़ रुपये से ज़्यादा रकम लगाकर दांव खेला है... ज़ाहिर है, इसकी कामयाबी के लिए ये धुरंधर कोई कसर नहीं छोड़ंगे...
क्रिकेट और ग्लैमर का ये मिलाजुला रूप और उसका प्रभाव दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा... इसकी बड़ी वजह यह भी है कि क्रिकेट को दीवानगी की हद तक चाहनेवाले इस देश में क्रिकेट के बाज़ार की ताकत का सही अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका... यह ज़रूर है कि कई जानकार आईपीएल की उपज को इंडियन क्रिकेट लीग (कपिल और एस्सेल ग्रुप) के जवाब के तौर पर देखते हैं... लेकिन उससे बड़ी बात यह है कि बीसीसीआई की आईपीएल ने दुनिया भर के सितारों को इकट्ठा कर इसकी रौनक बढ़ा दी है... यहां तक कि खिलाड़ी अपनी पुरानी काउंटी और देश की टीमों के प्रति ज़िम्मेदारियों से ऊपर उठकर सोच रहे हैं... यह बात दीगर है कि उसके लिए तर्क भी ढूंढ लिए गए हैं...
राजस्थान रॉयल स्क्वाड के शेन वॉर्न के मुताबिक आईपीएल में खेलना खिलाड़ियों को काउंटी से ज़्यादा तरजीह देने की बात नहीं है... उन्हें लगता है कि इससे दुनिया भर में क्रिकेट को बढ़ावा मिलेगा... उनका इशारा न सिर्फ क्रिकेट की लोकप्रियता पर है, बल्कि वह उन हरे नोटों की भी बात कर रहे हैं, जिसे खिलाड़ी कई बार घरेलू स्तर पर पाने से महरूम रह जाते थे...
आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स और बेंगलुरु के रॉयल चैलेंज की टीमें टक्कर लेंगी तो उनकी पहचान खिलाड़ियों से ज़्यादा इनके मालिकों की टक्कर के रूप में होगी... लोगों में होड़ है भी तो इस बात को लेकर कि शाहरुख की टीम जीतेगी या विजय माल्या की... प्रीति ज़िंटा की या मुकेश अंबानी की... दादा और द्रविड़ के नाम पीछे आ रहे हैं...
खालिस क्रिकेट को चाहने वालों में इसे लेकर आपत्ति भी है और डर भी कि कहीं ग्लैमर की चकाचौंध में खेल की मूल भावना दब न जाए... क्रिकेट के प्यूरिस्ट जानकारों को लगता है कि इसका असर टेस्ट या वन-डे पर पड़ना लाजिमी है... 70 टेस्ट और 63 वन-डे खेल चुके पूर्व ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ डेनिस लिली (355 टेस्ट विकेट, 103 वन-डे विकेट) मानते हैं कि इसका असर वन-डे क्रिकेट के अस्तित्व पर भी पड़ सकता है... उन्हें लगता है कि इस 20-20 लीग से वन-डे के मुकाबले टेस्ट क्रिकेट को ज़्यादा खतरा है...
दरअसल लिली का डर मीडिया मुगल कैरी पैकर के क्रिकेट आन्दोलन की याद ताजा करता है, जब 70 के दशक में पैकर ने वन-डे क्रिकेट को नई दिशा देने की कोशिश की... उस वक्त भी खालिस क्रिकेट से प्रेम करने वाले लोगों ने वन-डे क्रिकेट को पाजामा क्रिकेट कहकर मज़ाक उड़ाया था... लेकिन वक्त की कमी और ग्लैमर से भरपूर वन-डे ने टेस्ट की चाहत को पीछे ढकेला है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता... भारत जैसे क्रिकेट के दीवाने देश में भी स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद स्टेडियम पहुंचने वाले दर्शकों की संख्या इतनी कम होती है कि संदेह होने लगता है कि इस देश में क्रिकेट को लोग धर्म की तरह पूजते हैं...
20-20 क्रिकेट भी आज के दौर की हकीकत है... वैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20-20 क्रिकेट बहुत पुराना नहीं है... लीग और घरेलू स्तर पर अलग-अलग देशों में चाहे यह पहले भी खेला जाता रहा हो, लेकिन पहला अंतरराष्ट्रीय 20-20 मैच ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड के बीच फरवरी 2005 में खेला गया... और उसके बाद से साढ़े तीन घंटे का यह मैच जिस रफ्तार से खेला जाता है, उससे भी ज़्यादा तेज़ रफ्तार से बाज़ार में दौड़ रहा है... यह भी उम्मीद की जा रही है कि इन 44 दिनों में कई सितारे बेहद जल्दी दुनिया के मानचित्र पर अपना सिक्का जमाते नज़र आएंगे, तो कई खिलाड़ी इस जुझारू क्रिकेट में अपनी फिटनेस और क्रिकेट पर दांव लगाते नज़र आएंगे...
यही वजह है कि 20-20 अलग-अलग रूपों में लुभावने बाज़ार पैदा कर रहा है... ऐसे में क्रिकेट, मैदानों से बाहर कितने रूप अख्तियार करेगा, इसकी कल्पना ही की जा सकती है...
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1 comment:
न जाने क्यों मुझे ये लगता है कि करोड़ों रूपये लगाने वाले आईपीएल के ये टीम मालिक अपने पैसो की प्राप्ति के लिए मैचों को फिक्स करा सकते हैं.............आपका क्या विचार है
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