Monday, July 19, 2010

अकाल और उसके बाद -नागार्जुन

अकाल और उसके बाद
-नागार्जुन
कई दिनों तक चूल्हा रोया,
चक्की रही उदास/
कई दिनों तक काली कुतिया सोयी उसके पास/
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त/
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त.

दाने आये घर के अन्दर कई दिनों के बाद/
धुआं उठा आंगन के ऊपर कई दिनों के बाद/
चमक उठीं घर भर की आंखें कई दिनों के बाद/
कौए ने खुजलाई पांखें कई दिनों के बाद.

कविता में बिम्ब का इतना सुन्दर और संजीदा इस्तेमाल बाबा नागार्जुन के ही बस का था. वाह अद्भुत!

1 comment:

Dr.J.P.Tiwari said...

Bahut hi sudar bimb prayog. Anukarneey.