'हार कर जीतनेवाले को बाजीगर कहते हैं'....जिस फ़िल्म में शाहरुख़ खान ये डायलॉग कहते हैं उस फ़िल्म में उनका किरदार निगेटिव है.....लेकिन आप किंग खान के किसी भी नाइट राइडर्स से बात करें तो वो कहते हैं...'कमाल का बन्दा है'.... क्रिकेट टीम के धुरंधरों को खेल-भावना का पाठ पढानेवाले इस बाजीगर ने अपनी टीम के दिल में घर बना लिया है.
आईपीएल के पहले दो मैचों में शानदार जीत के बाद जब कोलकाता नाइट राइडर्स को लगातार चार हार का सामना करना पडा तो इस टीम के बड़े समर्थक भी इसकी आलोचना करते नज़र आये. लेकिन कभी ख़ुद एक अच्छे खिलाड़ी रह चुके शाहरुख़ ने हार नही मानी. उन्होंने अपनी टीम के साथ एक बड़ी पार्टी की. पार्टी में सभी खिलाडियों को कॉम्पैक का एक-एक कंप्यूटर दिया और दुनिया की नज़रों में हार का जश्न मनाया. इस पार्टी में शाहरुख़ ने अपनी टीम का जैसे मनोबल बढाया वो लाजवाब है.
शाहरुख़ ने अपनी टीम से कहा की अगर आप हारकर उठ नही सकते तो आप चैम्पियन नही हैं. किंग खान ने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए कहा ".. मैं नही चाहता हूँ कि आर्यन ( बेटा) कभी मार खाकर घर आए...लेकिन ये भी सही है कि अगर वो मार नही खायेगा तो कभी चैम्पियन नही बनेगा."
शाहरुख़ ने अपनी टीम में ये विश्वास भर दिया कि वो चैम्पियन हैं....और हारना एक सहज प्रक्रिया है... अगर आप इसे बिजनेस का भी नाम देना चाहते हैं... तो बिजनेस का भारत में ये अनूठा तरीका है..... शाहरुख़ कहते हैं " मुझे हार पसंद नही लेकिन मेरा बेटा अगर हार जाता है तो मैं उसे घर से निकाल नही देता. मैं उसे ट्रेन करता हूँ कि आगे वो जीतकर आए."
हर मैच से पहले शाहरुख़ टीम के सभी खिलाड़ियों को लंबे-लंबे एसएमएस करते हैं. लेकिन संदेश की इस प्रक्रिया में उनका मकसद टीम का हौसला बढ़ाने की कोशिश भर होती है. वो टीम पर दबाव नही डालते. वो खिलाडियों से खुलकर कहते हैं "आपको एक्टिंग नही आती, मुझे क्रिकेट नही आती. क्रिकेट खेलना आपका काम है. लेकिन आप मैच हार नही मानने जज्बे के साथ ही खेलें. "
कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के आकाश चोपडा कहते हैं कि बन्दे में बहुत दम है. आकाश कहते हैं की टीम के सभी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ शाहरुख़ की लीडरशिप और उनकी कमाल की खेल भावना के कायल हैं. शाहरुख़ अपनी टीम से बार-बार कहते हैं कि अब वो टीम के साथ हैं...इसलिए जीतेंगे तो टीम की तरह और डूबेंगे तो साथ-साथ.
आईपीएल शुरू होने से पहले ही जब शाहरुख़ ने कहा कि अगर वो कामयाब नही रहे तो पहले साल के बाद वो प्रीमियर लीग का साथ छोड़ देंगे. इसे लेकर विवाद तो हुआ लेकिन कम से कम शाहरुख़ के ईमानदारी से अपनी बात सबके सामने रखने की दाद देनी होगी. ये एक पारदर्शी तरीका है जब किसी कम्पनी के मालिक ने खेल शुरू होने से पहले ही अपनी टीम के सामने अपना लक्ष्य साफ कर दिया.
शाहरुख़ अपनी टीम से बात करते वक्त खिलाडियों को अहसास कराते हैं कि वो बहुत ख़ास हैं...और उनका शुक्रिया अदा करते हैं कि वो उनकी टीम के लिए खेल रहे हैं... शाहरुख़ की टीम पहले प्रीमियर लीग का खिताब जीते या नही....उनकी टीम के लिए उनसे बड़ा चैम्पियन कोई नही.
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3 comments:
वाकई बढ़िया लीडरशिप है
शाहरूख के बारे में आपके लेख से ही पता चला कि उसमें गज़ब की खेल भावना है..वहीं पर माल्या साहब की वजह से उनके खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले हार मान लेते हैं...जबकि सौरव की टीम की जिस तरह वापसी हुई है..शायद शाहरूख मोटीवेशन फ़ैक्टर की तरह काम कर रहे हों...अच्छा लगा पर्दे के पीछे की कहानी आपने अच्छी कही...
स्वागत है विमल, ब्लाग की दुनियां में, लगे रहो
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