आज से दस-पन्द्रह साल पहले और उससे भी पहले जब हम मोहल्ले में क्रिकेट खेलते थे, तो समय की कमी की वज़ह से और इसलिए भी कि मैच का नतीजा निकल आए आधे दिन का मैच खेलते थे। मैच उन दिनों भी 20-20 ओवर का ही होता था। ख़ास बात यह थी कि इन मैचों में हारने वाली टीम के कप्तान को जीतने वाली टीम के स्कोर-रजिस्टर में हस्ताक्षर करना पड़ता था, लेकिन हारने वाली टीम का कप्तान अगर कद-काठी में बलवान दिखता था तो कई बार अपने रौब के ज़रिये इस प्रक्रिया से बच जाता था।
आईपीएल में पंजाब के किंग्स इलेवन और मुम्बई इंडियन की टीमों को एक भी जीत नहीं मिली थी, इसलिए दोनों ही टीमें हर हाल में जीत हासिल करने के इरादे से मैदान पर उतरीं। मैच के दौरान श्रीसंत अपने ही स्टाइल में खिलाड़ियों को छेड़ते रहे (रॉबिन उथप्पा, शॉन पोलाक और मुसाविर खोते को), लेकिन उन्हें ये मालूम नहीं था कि मैच के बाद ये उन्हें इतना महंगा पड़ेगा। फिर भी, मैच ख़त्म होने पर मुम्बई इंडियन टीम के कप्तान हरभजन सिंह ने जो कुछ किया वह बिल्कुल ख़राब मोहल्ले क्रिकेट जैसा ही वाकया लगा।
भारतीय क्रिकेट में अनिल कुंबले के बाद सबसे ज़्यादा विकेट (275 टेस्ट विकेट) झटकने वाले स्पिन गेंदबाज़ भज्जी पहले भी विवादों में पड़ते रहे हैं। इस बार भले ही श्रीसंत ने उन्हें माफ़ कर दिया हो लेकिन ये वाकया उन्हें काफी महंगा पड़ने वाला है। साल के शुरुआत में (जनवरी 2007) में सिडनी टेस्ट के दौरान एंड्र्यू साइमंड्स से उनके झगड़े के बाद टीम इंडिया, बीसीसीआई और पूरा देश उनके साथ था लेकिन इस बार वह बिल्कुल अकेले हैं और उनके पीछे उनकी काबिलियत से ज़्यादा उनका विवादास्पद इतिहास है। उनके पंजाब के साथी युवराज (विपक्षी टीम के कप्तान) भी उनसे नाराज़ हैं। हरभजन ने सफाई दी की ये उनके और श्रीसंत के बीच का मामला है जिसे कोई मनाने को तैयार नही, बीसीसीआई भी नही। बड़ी बात ये है की इन सबका असर कहीं उनके फैंस की तादाद पर ना पड़े, और शायद स्पॉन्सर पर भी।
लेकिन, सिर्फ़ इस मुद्दे को लेकर उन्हें मोगेम्बो बना देना भी जायज़ नही लगता। दरअसल ट्वेंटी-20 क्रिकेट की फितरत ही ऐसी है कि इसे नतीजे के लिए खेला जाता है। इसमें पैसे की वज़ह से खिलाड़ियों पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव होता है। नतीजा (जीत) हर कीमत पर चाहिए। स्पॉन्सर, खिलाड़ी और उनके फैंस सब इसी चाह से टीम से जुड़े हैं। फिर इस खेल से जेंटिलमेन गेम की धारणा (औपनिवेशिक धारणा) अब लुप्त होती दिख रही है। क्रिकेट तीन घंटे का सिनेमा बना दिया गया है तो इसका सबसे ज़्यादा दबाव खिलाड़ियों पर बढ़ा है। अब यहां फुटबॉल मैदान जैसा जूनून दिखाई पड़ता है तो कई बार वैसी ही झड़प भी देखने को मिल जाती है। फिर ऐसा भी नहीं कि भज्जी की हरकत खेल की दुनिया की अकेली और अनूठी हरकत है।
करीब दो साल पहले 2006 वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान सुपरस्टार जिनेदिन जिदाने के किए गए हेड बूट (इटली के मार्को मतेरात्जी के ख़िलाफ़) को कौन भूल पाया है। उसी तरह करीब पांच साल पहले आर्सेनल के ख़िलाफ़ हार के बाद मैनचेस्टर युनैतेद के कोच सर अलेक्स फर्ग्युशन ने फुटबॉल ड्रेसिंग रूम में गुस्से में बूट फेंका जो सुपरस्टार खिलाडी डेविड बेकहम के सर पर लगा। खूब बखेड़ा हुआ। दुनिया भर के अखबारों में ये खबरें छाई रहीं।
खेल की दुनिया में ऐसे किस्से, विवादों के न जाने कितने उदाहरण आसानी से मिल जाएंगे। क्रिकेट में भी ड्रेसिंग रूम में ऐसे कई विवाद होते हैं जो सबके सामने नही आते। क्रिकेट स्टार शोएब अख्तर की मानें तो पाकिस्तान ड्रेसिंग रूम में छुरियां तक निकल चुकी हैं। हां, इन सबको आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा है जो जायज़ भी है। भज्जी भी इससे बचकर नही निकल सकते। भारतीय ड्रेसिंग रूम में भी ऐसी कई घटनाएं होती रही हैं जो कभी आप तक नही पहुंच पाईं। फिर श्रीसंत को तो पूरी दुनिया ने टेलिविज़न और तस्वीरों में फफक-फफक कर रोते देखा है।
भज्जी और दूसरे क्रिकेट खिलाड़ियों को अब यह याद रखना होगा की भारतीय फैन और मीडिया क्रिकेट के साथ अब खेल से ज्यादा धर्म और जुनून की तरह व्यवहार करते हैं। इसलिए ये फैंस अब उनके क्रिकेट करियर में उन्हें इस घटना के बगैर याद नही करेंगे। खासकर तब तो बिल्कुल भी नही जब उनका प्रदर्शन मैच में ख़राब होगा।
बीसीसीआई ने भज्जी को आईपीएल से निलंबित कर साफ कर दिया है की उन्हें आसानी से मुक्ति नही मिलने वाली। अस्सी के दशक के आख़िर में सुभाष घई की एक फिल्म के खलनायक डॉ. डेंग को हीरो दिलीप कुमार एक ज़ोरदार थप्पड़ लगाते हैं, तो डॉ. डेंग कहता है "इस थप्पड़ की गूंज सूनी तुमने राणा। अब तुम्हें इस गूंज की गूंज सुनाई देगी।" न्यूज़ चैनल्स और अखबारों ने ये तय कर दिया है की भज्जी जब तक क्रिकेट खेलेंगे उन्हें इस थप्पड़ की गूंज सुनाई देगी और अब उन्हें आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ) की भी पैनी निगाहों के पहरे में खेलना होगा।
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4 comments:
aachee lagi thaapr ki gunj..aphle kewal aapko tv pe dekhta tha aab blog pe bhi dekhunga.
Girindra
bahut bahut shukriya.Girindrajee ..mein aaj hee aap logon kee bahut baree duniya ka hissa banaa hun aur sabse pahlee pratikriyaa aapse milee hai....
lagta hai aap iss mahasagar mein khub dubkiyan lagaate hain...mulakat hotee rahegee...
shukriya
vimal
क्रिकेट इतिहास में यह पहला थप्पड़ है शायद. ग्यारह मैचों से निलंबन, लगभग तीन करोड़ का झटका. काफ़ी महंगा रहा यह थप्पड़. भज्जी का यह रेकार्ड शायद ही कभी टूट पाए.
dressing room mein pahle bhee aise kai wakyat hue hain...shoaib akhtar ne to khulkar ek interview mein kahaa kee pakistan ke dressing room mein to chhuriyan (Knife)tak nikalee hai....
bhartiya dressing room mein John wright ne sehwag ka collar pakad liya tha...isliye iss tarah kee ghatnayen to hotee rahtee hain....lekin agar yahaan bhajji ko nahee roka jaataa to maidaan par iska aur bhee bhadda roop dekhne ko mil saktaa hai....
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